Monday, 25 August 2014




             बिहार विधानसभा उपचुनाव परिणाम की मनमानी मीमांसा


बिहार में हुए उपचुनाव के नतीजे की व्याख्या कुछ भले लोग जातीय समीकरण की जीत के रूप में कर रहे हैं। पता नहीं उनकी याद्दाश्त इतनी कमज़ोर क्यों हो जाती है? बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन चंद दिन पहले कह रहे थे कि राजद का सारा वोट जद यू. को नहीं मिल सकता, न ही जद यू. का शत प्रतिशत वोट राजद के पाले में जायेगा। तर्क ये कि जॉर्ज व नीतीश की समता पार्टी की बुनियाद लालू प्रसाद की कुछ नीतियों के विरोध में पड़ी थी, जो आगे चलकर जद यू. की शक्ल में सामने आया। अतः अपने अंतर्द्वन्द्वों के चलते यह गठबंधन फेल हो जायेगा।
अब जबकि राजनीति की प्रयोगशाला बिहार में इस बड़े गठबंधन ने बाजी मार ली, तो उसकी मीमांसा में कुतर्क गढ़े जा रहे हैं। भाजपा, लोजपा व उपेंद्र कुशवाहा के गठबंधन में इन भलेमानुषों को अवसरवाद व जातिवाद नहीं दीखता। कमरतोड़ महँगाई व रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम में बेतहाशा वृद्धि, केंद्र की राजग सरकार की जनादेश के साथ अपनी मनमानी करने एवं मुख्यमंत्रियों के लगातार अपमान आदि के विरोध में जनता की यह सहज प्रतिक्रिया है। समय रहते चेत जायें, नहीं तो 2015 का परिणाम आपके अभिमान को धो कर रख देगा।
और हाँ, ये जंगलराज के आगमन की आशंका का राग अलापना छोड़ दीजिए, ये मर्सिया तराने किसी और दिन आपके काम आयेंगे। जब भी, जहाँ भी किसी वंचित, शोषित, उत्पीड़ित समाज की राजनीतिक अभिव्यक्ति पुख्ता ढंग से महसूस की जाने लगती है, लोकतंत्र को हाइजैक करने की मंशा पाले कुछ ठेकेदारों के पेट में दर्द शुरु हो जाता है, मानो लोकतंत्र को निखारने-सँवारने का दायित्व इकलौता इनका है। संघीय ढाँचे पर लगातार चोट करने वाले अब भी नहीं संभले , तो उनका मद उन्हें कहीं का न छोड़ेगा। बाकी रहा, इस गठबंधन के 2015 में और भी फलने-फूलने की बात और परिणामस्वरूप बिहार के रसातल में चले जाने की आपकी चिंता, तो आप फिक्र करना छोड़ दीजिए। बिहार के लोग राजनीतिक रूप से काफी परिपक्व हैं, सामाजिक समरसता की परिधि को भी अपरिमित करना बेहतर जानते हैं, अपना भला-बुरा उन्हें आपसे ज्यादा मालूम है।
मैं तो अक्सर कहता हूँ, भारतीय लोकतंत्र उस पुण्य-सलिला, सतत प्रवहमान गंगा की तरह है, जिसमें स्व-शुद्धीकरण की क्षमता है। तमाम सुधार की गुंजाइश के बावजूद यह अपनी गंदगी को खुद साफ कर लेगा। फिलहाल बिना किसी राग-द्वेष के, वैमनस्य के बिहार विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को ठंडे मन से, निर्विकार भाव से स्वीकार कीजिए व लोकतंत्र के प्रति अपनी आस्था बनाए रखिए।

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