Tuesday, 13 May 2014

11 मई को मैं कोई स्टेटस नहीं डाल पाया । दुनिया की हर माँ को मातृ-दिवस की देर से बधाई के लिए दिली खेद के साथ उनके नाम पाती :

माँ ! 

मेरे लिए हर दिन मातृ-दिवस है । दुनिया की हर माँ को मैं प्रणाम करता हूँ । माँ नौ माह तक बच्चे को गर्भ में रखती है और सारी ज़िन्दगी अपने दिल में । 'माँ' शब्द ऊर्जा देता है । माँ ने इस दुनिया में आने का, इसे देखने-समझने का मौका दिया है । इसका कोई प्रतिदान हो सकता है ? 

गीले में सोती रही, सूखे में था लाल
माता तेरे प्यार की जग में नहीं मिसाल ।
-नामालूम

"The sweet, soft freshness that blooms on baby's limbs- does anybody know where it was hidden so long ? Yes, when the mother was a young girl, it lay pervading her heart in tender and silent mystery of love - the sweet, soft freshness that has bloomed on baby's limbs."

- Tagore in Gitanjali

वाकई, माँ का आँचल ममता की मंजूषा, करुणा का क्रोड़, स्नेह का शिविर और शांति का सुख-सदन है । सच ही कहते हैं कि संधि वार्ता यदि कृष्ण और दुर्योधन के बीच न होकर कुंती और गांधारी के बीच हुई होती, तो बहुत संभव था कि महाभारत नहीं मचता ।

अल जन्नतो तहता अकदामिल उम्महात,
फइन्नुल जन्नता इन्दा रिज्लहा ।

(नफई, तबरामीं, हयसमी) The Prophet Mohammed

[ The heaven lies under the feet of mother.]

माँ को हम माँ बुलाकर ही अंदर से कितना भर जाते हैं । माँ की गोद दुनिया की सबसे सुरक्षित ज़गह है । जब सारी दुनिया आपकी ओर से निराश हो जाती है, तब भी दो आँखें प्रतीक्षारत पलकों के साथ आपकी तरफ टकटकी लगाये रहती हैं - एक माँ की और दूसरी आदर्श शिक्षक की ।

नहीं जानता कौन, मनुज आया बनकर पीने वाला
कौन अपरिचित उस साकी से जिसने दूध पिला पाला
जीवन पाकर, मानव पीकर मस्त रहे इस कारण ही
जग में आकर सबसे पहले पाई उसने मधुशाला ।

- बच्चन

मुझे याद नहीं कि कभी मम्मी ने मुझे पढ़ने कहा हो । कभी कहा भी तो बस इतना कि किताबें लेकर बैठ जाओ, पापा आते होंगे, गुस्सा हो जायेंगे । मतलब, पापा की नाराज़गी झेलनी न पड़ती, तो वो कब का मुझ अकर्मण्य को पढ़ाई-लिखाई के अरुचिकर कार्य से छुटकारा दिला देतीं । जब कभी पापा बिगड़े, मेरी अंतिम शरणस्थली मम्मी ही बनी । मुझ परजीवी के लिए खतरनाक प्राणी तो बस पापा रहे हैं, मम्मी हमेशा से स्नेहमयी, वात्सल्यमयी रही है ।

भड़क जाने की ख्वाहिश कुछ तो चिंगारी में रहती है,
हवा भी उसको शह देने की तैयारी में रहती है ।
उसे मालूम है कि बच्चे बिगड़ जाते हैं शोखी में,
मगर माँ है कि बच्चों की तरफदारी में रहती है ।

आज भी जब घर से फ़ोन आता है, तो बस इतना पूछती है कि और, नहाया-धोया, खाना खाया ? तबीयत कैसी है ? मन लग रहा है ? पढ़ाई के बारे में पूछकर कभी माहौल को बोझिल नहीं बनाती, बातचीत का मज़ा कम नहीं होने देती । हाँ, चुपके से पापा को फ़ोन ज़रूर थमा देती है । सचमुच,

"A child learns the best lesson of citizenship between the kisses of the Mother and the cares of the Father."

- Mazzini

मुझे अपने लिए हमेशा अलग से समय चाहिए होता है । जब मैं मम्मी से बात करूँ, तो वो समय सिर्फ मेरा है, उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं, किसी की हिस्सेदारी नहीं । हाँ, जब सब मिल बैठ कर बातें करेंगे, तो उसमें मैं भी शरीक हो जाऊँ, क्या दिक्कत है ।

"God could not be everywhere, hence He made Mother."
-Anonymous

एक बात के लिेए मैं मम्मी के प्रति हमेशा विशेष रूप से कृतज्ञ रहा हूँ कि उन्होंने बचपन से ही हर माँ को अपनी तरह ही सम्मान देने को प्रेरित किया । और आज ईश्वर ने मेरे जीवन में कुछ बेहद ख़ूबसूरत, अनुपम और रूहानी रिश्ते उपहारस्वरूप दिये हैं । ये रिश्ते अतुलनीय हैं, वंदनीय हैं । इनसे मेरा आत्मिक लगाव व जुड़ाव उतना ही है, जितना मम्मी से । न कम, न ज़्यादा । कभी मम्मी मेरी तरफ से ख़ुद को असुरक्षित महसूस नहीं करतीं, बल्कि बोलती हैं कि मुझे अपने मातृत्व और तेरी परवरिश पर गर्व है कि ईश्वर की अनुकम्पा से मैं तुझे ऐसा बना सकी कि तू किन्हीं के दिल में इतनी ज़गह पाता है और तेरे अंदर इतनी गुणग्राह्यता है कि तू मेरी तरह ही किन्हीं और में 'माँ' का दर्शन कर लेता है, माँ की छवि पा लेता है । तू मुझे फॉर ग्रांटिड लेगा, चलेगा, पर इन दैवी रिश्तों को हमेशा अमूल्य निधि की तरह सहेज कर रखना, संभाल कर रखना, प्यार से रखना । 'माँ' शब्द की गरिमा गिरने न देना, सम्बन्ध के घनत्व कभी घटने न देना । मम्मी, तुम अनमोल हो, अद्वितीय हो ।

"Mother is the name of God on the lips of little children."
- W.M.Thackeray

जहाँ दिल खुशी से झुका मेरा, मैंने सर भी वहीं पे झुका दिया,
मुझे अंज इससे गरज नहीं, ये अज़ाब है कि सवाब है ।

माँ कुशल, जिनसे इस जन्म का तो रक्त-संबंध नहीं है, पर ये पिछले जन्म का ही पुण्य कहू्ँ कि इस जन्म में भी उसी कुरबत, खुलूस और आत्मीयता से हमारा रिश्ता अपनी खुशबू बिखेरता रहा है । शुरु में इन्हें बड़ी मम्मी बुलाता था । एक बार इन्होंने कहा, एक बात कहूँ, मानेगा ? मैंने कहा, आपका हर आदेश सर आँखों पर । इन्होंने कहा, आदेश नहीं, मेरी दिली ख़्वाहिश है । तू मुझे माँ बुलाएगा ? तब से  मैं मम्मी को मम्मी और इन्हें  माँ बुलाता हूँ । हाँ, हमारे मतांतर व नाराज़गी भी उसी अनुपात में रहे हैं । मैं इनकी नाज़ुककलामी और नाज़ुकख़्याली का क़ायल रहा हूँ, तो ये मेरी नाज़ुकमिज़ाजी से परेशान । इनका ज़ोर क्वॉलिटि टाइम पर रहता है, मेरी जिद क्वॉलिटि के साथ-साथ क्वॉन्टिटि टाइम भी एक साथ गुज़ारने की होती है । जब से मम्मी शिक्षिका बनी हैं, घर जाने का मज़ा ही कम हो गया है और आगामी 25 साल तक (उनकी सेवानिवृत्ति तक) उनके घर में ज़्यादा समय रहने के आसार कम ही हैं ।


"What is home without a Mother ?"
- Alice Hawthorne

ऐसे में माँ कुशल की ओर से भी समय का रोना मुझे गुस्सा दिला देता है और मैं चिड़चिड़ा हो जाता हूँ । जब ये बात छोटे शालीन को वो बताती हैं, तो मुझे बुरा लगता है । खैर, अनेक खट्टी-मीठी यादें इनसे जुड़ी हुई हैं । पहले माँ के साथ बगल में सोने को लेकर युगीन के साथ अक्सर मेरा झगड़ा हुआ करता था । अब वो भी बड़ा हो गया है और शायद मैं भी । और, अब हम थोड़े शरीफ भी हो गये हैं ।

माँ ने जितनी बार मुस्करा कर मेरी तरफ देखा होगा,
उसमें से एक मुस्कराहट का भी हक़ अदा न हुआ होगा ।

जीवन के हर मोर्चे पर माँ मेरे साथ रही हैं । मेरा दिल्ली आने का निर्णय इन्हीं का था । बगैर मम्मी-पापा को बताये मैं पढ़ाई करने दिल्ली आ गया, ये सिर्फ माँ को पता था । पापा-मम्मी को इसलिए नहीं बताया गया कि वो भागलपुर में ही मेरी आगे की पढ़ाई भी जारी रखने के पक्ष में थे । इन्होंने तब मेरी "Friend, Philosopher and Guide" की भूमिका निभाई । पिछला लगभग एक साल हमारे लिए अनुशासन-पर्व की भाँति था । बहरहाल उजालों का सफ़र जारी है । माँ की आभा से पथ यूँ ही ज्योतित रहे ! माँ के जीवन में सुख-शांति-चैन-सुकून रहे !

माँ, तू मुझमें बहती है, मैं तुझमें रहता हूँ ।


परसों, दूसरी बार इस ख़ास मौके पर मैं माँ  के पास था । उनको बिना बताए सरप्राइज़ देने पहुँच गया । बाद में उन्होंने अपनी सहकर्मियों से परिचय कराया कि यह मेरा बेटा है, दोस्त है । सिर्फ विश करने इतनी दूर से आया है । सचमुच चार साल कैसे लड़ते-झगड़ते, रूठते-मानते-मनाते  गुज़र गये, पता ही न चला । मेरी दोनों किडनी खराब होने की जब आशंका जताई जा रही थी, तो कितना घबरा गई थीं ये और रोते हुए कहा था कि मैं अपनी किडनी दूँगी, पर मेरे रहते तुझे कुछ नहीं हो सकता । हालाँकि बाद में वो आशंका निर्मूल निकली । परीक्षा के दबाव के दिनों में कितना ख़याल रखती रही हैं माँ ।

मेरे चेहरे पर जब भी फिक्र के आसार पाये हैं
मुझे तस्कीन दी है, मेरे अंदेशे मिटाये हैं ।

"A generous mother, who sincerely seeks her child's welfare, will as a rule think it is wiser to make a 'true woman' of her, since society will more readily accept her if this is done."

- Simon de Beauvior

मेरी प्राध्यापिका डॉ. नीलिमा, जिन्हें शिक्षक-दिवस पर सबसे बाद में और मातृ-दिवस पर सबसे पहले बधाई देना पसंद करता हूँ । इन्होंने मुश्किल समय में मेरा उत्साहवर्धन किया है । हर पग पर साथ होती हैं । किसी भी साक्षात्कार में जाने से पहले इस ममतामयी माँ का आशीष लेना नहीं भूलता । एक बार इन्होंने फ़ोन पर मुझसे कहा था, "अभी-अभी पूजा पर से उठी हूँ । कोई भी अच्छा काम मैं पूजा करके करती हूँ । मैं आश्वस्त हूँ कि आप इंटरव्यू में नहीं छटेंगे । यह बात मैं आपके और अनुनय के लिए पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूँ ।" मार्च में दिल्ली आई थीं, तो हमने इत्मीनान से बातें कीं, उन्होंने कई ज़रूरी सलाह दी । थोड़ी अस्वस्थ चल रही थीं । माँ, आपके आरोग्यमय जीवन के लिए हमेशा प्रार्थना करता हूँ । कुछ अच्छा करके आपको बताने की उत्सुकता रहती है और आपका ये कहना कि "जो जयन्त टी.एन.बी. कॉलेज के हॉल में समाँ बाँध सकता है, वो कहीं भी छा सकता है, आपको जो अच्छा लगता है, आप वही करें", मुझे कितना अनुप्राणित कर देता है ।


"Mother's life is often an epic of selfless love and heroic abnegation."
-Veni Pd. Verma

एक बार आपके कहने पर मैंने एक छात्रवृत्ति के लिए अपना आलेख भेजा था, पर शायद समय पर नहीं पहुँचने के कारण या शब्द-सीमा का अनुशासन तोड़ने के चलते मुझे स्कॉलरशिप नहीं मिल पाई थी । उस वक़्त मैं ख़ुद के लिए नहीं, आपके लिए थोड़ा मायूस था । पर बाद में आपने कितनी सहजता से उसी शाम मुझसे बात की थी और लाड़ किया था । "जब कभी निराशा हो, मेरी ज़रूरत महसूस हो, कभी भी आप मुझसे बात कर सकते हैं, मैं हमेशा आपके लिए सहज-सुलभ हूँ ।", आपका यही स्नेह तो मुझे आगे बढ़ाता है, टूटने नहीं देता । माँ, हर क़दम पर, हर मोड़ पर आपकी ज़रूरत है मुझे ।

दत्ता साहब मेरे प्रातःस्मरणीय गुरुदेव हैं । मैंने उनसे एक बार कहा था, "Sir, you are the Daniel Jones of Bhagalpur." क्या उच्चारण-सौंदर्य है उनका ! उस परिवार में गुरुमाता ने मेरी सहज-स्वीकार्यता इतनी बढ़ा दी थी कि कोई मदर्स डे भागलपुर में उनको घर जाकर विश किए बिना मुकम्मल ही नहीं होता था । उन्होंने एक बार मुझे एक क़लम दी थी यह कहते हुए कि इसे मैंने सुमित को भी नहीं दिया, तेरे लिए बचाकर रखा था । आज भी मैं उसे बड़े प्यार से संभालकर रखता हूँ । होली में सर बोलते थे, "ये खाओ बेटा, तुम्हारी माँ के हाथ का बना हुआ है ।" ओह, कितना स्नेह लुटाती हैं वो ।

और यदि माँ पूनम का ज़िक्र न करूँ तो दास्तान-ए-माँ अधूरी रहेगी । एक बहुत ही प्यारा रिश्ता बन गया है माँ के साथ । माँ की स्नेहसिक्त, प्यार से सनी बातें कितना कुछ दे जाती हैं । जीवन को अर्थ देती हैं । माँ कहती हैं, "मैं चाहती हूँ, मेरा बेटा सबसे आगे रहे ।" उनकी यह पवित्र चाहत ही तो मुझे जूझने की शक्ति, जीवटता और जीवन्तता देती है । उनकी यह अपेक्षा उड़ान को नयी जान देती है । माँ, आप मेरे लिए कुदरत का अनमोल तोहफा हो, जिसे हर नज़र से बचाये रखना चाहता हूँ ।

वस्तुतः, "कुपुत्रो जायेत् क्वचिदपि कुमाता न भवति" ।

                                                   - सप्तशती

"I remember the night, my mother was stung by a scorpion.
My mother only said, Thank God,
the scorpion picked on me
and spared my children."

- Nissim Ezekiel in "The Night of the Scorpion"

सच में, माँ के बिना ज़िन्दगी की कल्पना नहीं हो सकती । आदमी माँ की गोद से लुढ़ककर चलना सीखता है, फिसलते-फिसलते जवान हो जाता है, संभलते-संभलते बूढ़ा, फिर तो लुढ़ककर अलविदा । पर इस पूरी यात्रा में वो माँ की नज़र में शिशुवत ही रहता है, छोटा-सा, प्यारा-सा, दुलारा-सा बच्चा ।

मैैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आँसू,
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया आँचल अपना ।
-मुनव्वर

माँ, मैं जानता हूँ, आपके पास हमेशा नहीं रह सकता, पर आपसे दूर भी कहाँ हूँ ! आपका हर कौर याद है, आपके दूध की ख़ुशबू और तासीर जब तक मेरे ख़ून में है, दोस्ती, अखलाक़ मोहब्बत, मुरव्वत, रवादारी और वफादारी कभी कम न होगी । आपका आँचल दुनिया की हर तपिश से बचायेगा । माँ का दूध बदनाम न हो, इस संज़ीदगी से हर क़दम आगे बढ़े - बस इतनी दुआ देती रहो ।

सह विविध यातना मनुज जन्म पाता है, धरती पर शिशु भूखा-प्यासा आता है ।
माँ सहज स्नेह से ही प्रेरित अकुला कर, पय-पान कराती उर से उसे लगाकर ।
मुख चूम जन्म की क्लान्ति हरण करती है, दृग से निहार अंग में अमृत भरती है ।
वात्सल्य से भर अंक में शिशु को उठाती है, पय का पहला आहार दे क्षुधा भगाती है ।

- दिनकर

"The child cries out when from the right breast the mother takes it away, in the very next moment to find in the left one its consolation."

- Tagore in Gitanjali

मेरी प्यारी अम्मा ! अनुभूति को अभिव्यक्ति देना सहज नहीं है, पर एक वाक्य में कहूँ तो आपके स्नेहाशीष और भावनात्मक जुड़ाव को सहेज कर रखना चाहता हूँ -अनगिनत रूपों में, अनगिनत बार, इस जन्म में भी, इस जीवन के बाद भी ।

LOVE YOU HAMESHA ! कितना, मैं नहीं जानता...


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